लोग देखते हैं अक्सर,
टूटता हुआ तारा,
जो जमीन को छूने की धुन में,
तेज गति से आता है ,
जल जाता है,
नष्ट हो जाता है,
कभी सोचा ,
क्यो होता है ऐसा,
क्यों करता है वो ऐसा,
प्रेम के लिए आता है,
या प्रेम के लिए,
आकाशगंगा से निकाल दिया जाता है,
मतलब हर जगह प्रेम की मुख़ालफ़त है ,
तारा धरती से नहीं मिल सकता,
धरती तारे से नहीं,
फिर मेरी और तुम्हारी औकात ही क्या है,
हम न तारा हैं न धरती हैं,
हमें बढ़ना है,
दोनों को एक साथ,
एक दूसरे की तरफ,
फिर किसको परवाह है,
मिल कर जलें,
या जल कर मिलें।
