Author: कौशल गोरखपुरी ' कक्का '
साथ चाहिए
मन में उल्लास चाहिये जीने के लिए प्रिये तेरा साथ चाहिए हमें जीने के लिए जीवन की इस बेला में मन मरुथल क्यूँ हो गया आशाओं के वसंत में मन पतझड़ क्यूँ हो गया मन मधुप को…
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